अचानक आम आदमी पार्टी और भाजपा दोनों के लिए क्यों अहम हो गई है कांग्रेस, वजह कर देगी हैरान!

 


अचानक आम आदमी पार्टी और भाजपा दोनों के लिए क्यों अहम हो गई है कांग्रेस, वजह कर देगी हैरान!



सार



  • कांग्रेस पर प्रचार में जोर देगी भाजपा

  • चुनाव प्रचार में कांग्रेस के शिथिल प्रचार से रणनीतिकार चिंतित

  • सोनिया की खराब तबियत के कारण कांग्रेस का चुनाव प्रचार हुआ और शिथिल

  • आम आदमी खुश, नहीं बंटेगा ज्यादा वोट, हारेगी भाजपा



 

विस्तार


मेरी आंख फूटे कोई बात नहीं, पड़ोसी की दोनों आंखें फूट जाए तो अच्छा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में यह कहावत चरितार्थ होती दिखाई पड़ रही है। भाजपा और आम आदमी पार्टी के लिए कांग्रेस बड़ी अहम हो गई है। कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी का स्वास्थ्य शिथिल है। वह सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं। रुटीन चेकअप चल रहा है।



 

इसके कारण पार्टी के स्टार प्रचारक राहुल गांधी और प्रियंका प्रचार अभियान को भरपूर समय नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन इस स्थिति से आम आदमी पार्टी को जहां राजनीतिक लाभ मिल रहा है, वहीं भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ गई है। बताते हैं भाजपा ने प्रचार अभियान के दौरान कांग्रेस पार्टी पर जोर देने की भी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

महाराष्ट्र की तरह चुपचाप लड़ रही है कांग्रेस


भाजपा के नेता तर्क दे रहे हैं कि महाराष्ट्र में कांग्रेस बिनी शोरशराबे के लड़ी। मैदान में नहीं उतरी, फिर भी विधानसभा सीटें आई। भाजपा नेताओं का कहना है कि दिल्ली में भी इसी तरह त्रिकोणीय मुकाबला होगा। त्रिकोणीय मुकाबले में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के बीच में वोट बंटेगा और दिल्ली में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनेगी और सरकार बनाएगी।

भाजपा के दिल्ली के नेताओं की तरफ बढ़िए। इनका कहना है कि कांग्रेस भाजपा को रोकने के लिए राजनीतिक आत्महत्या कर रही है। वह आम आदमी पार्टी को जिताने में सहयोग दे रही है। ताकि दिल्ली में भाजपा को बढ़त न मिल सके।

कांग्रेस के पास बचा ही क्या?


दिलचस्प है कि ऐसे मुद्दों पर आम आदमी पार्टी के नेता मुस्करा देते हैं। वह कहते हैं कि कांग्रेस के पास बचा ही क्या? न कोई पार्टी के पास नेता है, न उम्मीदवार, न मुख्यमंत्री का चेहरा। आखिर किस बूते दिल्ली में कांग्रेस पार्टी लड़ेगी।

पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह जैसे नेता इस तरह के वाक्यों से खुद को तसल्ली दे देते हैं, लेकिन दबी जुबान से उनका भी मानना है कि दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की मजबूती से न लड़ने का उनकी पार्टी को फायदा मिल रहा है।