कोरोना वायरसः त्यौहार में मुरझाया फूल उद्योग, नवरात्र में मंदिर बंद होने से करोड़ों का नुकसान
सार
- गाजीपुर फूलमंडी के कुल 414 थोक व्यापारियों में केवल दस पहुंचे
- छोटे व्यापारियों को भी औसतन दो लाख रुपये का नुकसान
- हजारों की बजाय अब बीस महिलाएं ही कर रही दिहाड़ी पर काम
विस्तार
कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। कोरोना वायरस के खतरे के कारण मंदिर, मस्जिद सहित सभी धार्मिक स्थल भी बंद कर दिए गये हैं। इससे फूलों के व्यापार को बड़ा झटका लगा है। फूलों के थोक व्यापारियों को जहां करोड़ों का नुकसान हो रहा है, वहीं फूलों की माला बनाने वाले हजारों दिहाड़ी श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट हो गया है।
रोज आठ से दस करोड़ रुपये का नुकसान
गाजीपुर फूल मंडी के थोक व्यापारी पप्पन ने अमर उजाला को बताया कि मंदिरों के बंद होने से इस व्यवसाय को भारी झटका लगा है। गाजीपुर फूल मंडी में रजिस्टर्ड 414 थोक व्यापारी हैं, लेकिन इनमें से दस भी मंडी नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की कुछ घरेलू खपत के रूप में फूलों की बहुत कम बिक्री हो रही है।
बाहर से आने वाले फूलों की खरीद-बिक्री पूरी तरह से बंद हो गई है। फूल कारोबारियों के मुताबिक छोटे थोक व्यापारियों को भी इस नवरात्र के नौ-दस दिनों में डेढ़ से दो लाख रुपये की आय हो जाती थी, लेकिन इस बार यह व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया है। इन व्यापारियों को केवल नवरात्र के दौरान आठ से दस करोड़ रुपये के बीच नुकसान हो रहा है।
बाहर से आने वाले फूलों की खरीद-बिक्री पूरी तरह से बंद हो गई है। फूल कारोबारियों के मुताबिक छोटे थोक व्यापारियों को भी इस नवरात्र के नौ-दस दिनों में डेढ़ से दो लाख रुपये की आय हो जाती थी, लेकिन इस बार यह व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया है। इन व्यापारियों को केवल नवरात्र के दौरान आठ से दस करोड़ रुपये के बीच नुकसान हो रहा है।
दिहाड़ी श्रमिकों पर भी संकट
गाजीपुर फूल मंडी में औसतन 500 से 700 महिलाएं फूलों की माला बनाने का काम करती हैं। शादियों या विशेष त्योहारों के समय यह संख्या बढ़ जाती है। इन्हें एक माला बनाने का एक रुपया मिलता है। माला की एक गुच्छी के लिए इन्हें दस रुपये मिलते हैं। एक महिला एक दिन में 400 से 500 रुपये कमा लेती है। लेकिन कोरोना ने इन महिलाओं का रोजगार छीन लिया है।
संक्रमण रोकने की कोई व्यवस्था नहीं
मंडी में काम करने वालों का कहना है कि कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लोग अपने स्तर पर ही मास्क लगाये रखते हैं। अभी मंडी को बंद करने जैसा कोई फैसला भी नहीं लिया गया है। दिहाड़ी श्रमिकों का घर चलना मुश्किल हो गया है, लेकिन इनके लिए अभी किसी राहत की घोषणा नहीं की गई है।